देश की प्रमुख विमानन कंपनी Air India ने बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच बड़ा फैसला लेते हुए अपनी उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने की घोषणा की है। कंपनी ने बताया कि यह बढ़ोतरी चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी, जिससे आने वाले समय में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों के टिकट महंगे हो सकते हैं। एयरलाइन के इस निर्णय से हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की जेब पर सीधा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
कंपनी के अधिकारियों के अनुसार हाल के महीनों में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। विमानन उद्योग में ईंधन की लागत कुल परिचालन खर्च का बड़ा हिस्सा होती है, इसलिए ईंधन महंगा होने से एयरलाइनों के खर्च में भी तेजी से इजाफा हो जाता है। इसी बढ़ते वित्तीय दबाव को देखते हुए एयर इंडिया ने फ्यूल सरचार्ज में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है।
एयर इंडिया समूह का कहना है कि यह कदम एयरलाइन की सेवाओं को सुचारु रूप से जारी रखने और परिचालन लागत को संतुलित बनाए रखने के लिए जरूरी हो गया था। हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यात्रियों पर अचानक अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसलिए फ्यूल सरचार्ज को एक साथ बढ़ाने के बजाय इसे धीरे-धीरे लागू किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में हो रही तेजी का असर सीधे विमानन क्षेत्र पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने से एटीएफ महंगा हो जाता है, जिससे एयरलाइनों के लिए टिकट कीमतों को स्थिर रखना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि कई एयरलाइंस समय-समय पर फ्यूल सरचार्ज में बदलाव करती रहती हैं।
मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर रही हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण तेल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है। इसका सीधा असर विमानन कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है।
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में और वृद्धि होती है तो अन्य एयरलाइंस भी इसी तरह के कदम उठा सकती हैं। ऐसे में हवाई यात्रा का खर्च और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं यात्रियों को भी भविष्य में उड़ानों के किराए में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल एयर इंडिया का कहना है कि वह यात्रियों को बेहतर सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है और परिचालन लागत के दबाव के बावजूद उड़ानों की गुणवत्ता और सुविधा को बनाए रखने का प्रयास जारी रखेगी।