संसद में मोदी: विदेश में फंसे भारतीय सुरक्षित, सरकार फुल अलर्ट
पश्चिम एशिया में चल रही युद्ध की स्थिति के बीच प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के समझ उठ रही चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने यह बताया कि यह संकट भारत की आर्थिक सुरक्षा और मानवीय जीवन तीनों स्थितियों पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया की सरकार की पहली प्राथमिकता देश और विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रखना है। इसलिए सरकार इस दिशा में लगातार मजबूत कदम उठा रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा की युद्ध से प्रभावित क्षेत्रों में फंसे हुए हर एक भारतीय नागरिक को सुरक्षित अपने देश वापस लाने के लिए सरकार मिशन मोड में कार्य कर रही है। बताया जा रहा है अब तक करीब 3 लाख 7 हजार से ज्यादा भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत लाया गया है। इसके अलावा भारत व युद्ध से प्रभावित देशों में 24 घंटे कंट्रोल रूम और आपातकालीन हेल्पलाइन कायम की गई है जिसकी सहायता से लोगों को तेजी से जरूरी जानकारी और सहायता पहुंचाई जा रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने पश्चिम एशिया के कई देशों के प्रधानमंत्री से दो चरणों में बातचीत की है और सभी देश ने भारत की सुरक्षा को लेकर पूरा भरोसा दिलाया है। लेकिन इस बीच भारतीयों की जान जाने व कुछ लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है, जिनके परिवारों को हर प्रकार की सहायता दी जा रही है।
प्रधानमंत्री ने ऊर्जा और व्यापार पर पड़ रहे प्रभावों पर भी बात की और कहा की हारमोंस स्ट्रेट के जरिए माल निर्यात करने में सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। यह वही मार्ग है जहां से कच्चा तेल, गैस और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं को बड़ी मात्रा में भारत लाया जाता है।
युद्ध के कारण यहां से जहाज व कार्गो शिप की आवाजाही मुश्किल हो गई है लेकिन इसके बावजूद भी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि, पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति का प्रभाव आम जनता पर ना पड़े। उन्होंने यह भी बताया कि भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का 60% आयत करता है, ऐसे में आपूर्ति करना मुश्किल हो रहा है जिसको देखते हुए घरेलू उत्पादन बढ़ाने और उपलब्ध तथा रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत के पास 5.3 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा का पेट्रोलियम भंडार मौजूद है और 6.5 मिलियन मीट्रिक टन भंडारण की पूर्ति पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। इसके अलावा तेल कंपनियों के अलग भंडार भी है जिससे कभी भी आपातकालीन स्थिति में देश की जरूरत को पूरा किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि पिछले 11 सालों में देश की रिफायनिंग क्षमता काफी बढ़ गई है और सरकार लगातार अलग-अलग देशों के सप्लायर्स के साथ संपर्क में है, ताकि हर संभव स्रोत से तेल और गैस की पूर्ति की जा सके।
किसानों के हितों की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संकट में किसानों को सुरक्षित रखा जा रहा है। जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है और भविष्य में यदि उन्हें किसी प्रकार की मदद की जरूरत हो तो सरकार उनके लिए हमेशा खड़ी रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध से प्रभावित हुए देश के साथ भारत के बहुत व्यापक व्यापारिक रूप से संबंध है और यह क्षेत्र विश्व में व्यापार करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण मार्ग है ऐसे में इन संकट का असर बड़े स्तर पर देखा जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार संवेदनशील व सतर्क है और हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने इस बात पर भी जोड़ दिया की संकट के समय में भारत की संसद की एकजुट और सर्वमत आवाज को दुनिया तक पहुंचाना बहुत जरूरी है, ताकि विश्व स्तर पर शांति और स्थिरता का संदेश लोगों तक पहुंचे।


