मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच गुरुवार को वैश्विक तेल बाजार में भारी हलचल देखने को मिली। जानकारी के अनुसार ईरानी नौकाओं ने इराक के जलक्षेत्र में दो तेल टैंकरों पर हमला कर दिया, जिससे उनमें आग लग गई और एक नाविक की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
हमलों के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार तुरंत प्रभावित हो जाता है।
तनाव बढ़ने के साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल का भाव लगभग पाँच प्रतिशत बढ़कर करीब 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल लगभग 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। इससे पहले सप्ताह की शुरुआत में ब्रेंट कच्चा तेल 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था।
वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र पर नजर रखने वाली संस्था International Energy Agency ने कहा है कि मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष वैश्विक तेल आपूर्ति के इतिहास में सबसे बड़े व्यवधानों में से एक बन सकता है। संस्था ने स्थिति को संभालने के लिए रणनीतिक भंडार से लगभग 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे केवल सीमित राहत मिल सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार खाड़ी क्षेत्र के कई देशों ने मिलाकर लगभग 1 करोड़ बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादन में कटौती की है, जो दुनिया की कुल मांग का लगभग 10 प्रतिशत माना जाता है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो वैश्विक बाजार में आपूर्ति संकट और गहरा सकता है।
इसी बीच युद्ध का दायरा भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। लेबनान के सशस्त्र संगठन Hezbollah ने इज़राइल की ओर बड़ी संख्या में रॉकेट दागे, जिसके बाद इज़राइली हमलों से Beirut में जोरदार धमाकों की खबरें सामने आईं। वहीं यह आशंका भी जताई जा रही है कि यमन के विद्रोही संगठन Houthis भी इस संघर्ष में शामिल हो सकते हैं, जिससे लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री व्यापार पर और असर पड़ सकता है।
तेल आपूर्ति संकट की आशंका के बीच China ने भी एहतियाती कदम उठाते हुए मार्च महीने के लिए परिष्कृत ईंधन के निर्यात पर तत्काल रोक लगा दी है, ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते तेल आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल के दामों में और तेजी आ सकती है, जिसका असर दुनिया भर में महंगाई और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।