ट्रंप की 'डेडलाइन' का काउंटडाउन शुरू !
दुनिया इस समय एक ऐसे तनावपूर्ण मोड़ पर खड़ी है जहाँ अमेरिका और ईरान के बीच के हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ऐलान किया गया,48 घंटे का अल्टीमेटम काउंटडाउन अब अपने आखिरी चरण में पहुंच चुका है जिससे विश्व स्तर पर चिंता बढ़ गई है। आने वाले घंटे बेहद मुश्किल व नाजुक माने जा रहे हैं जिससे यह तय हो सकता है कि हालात शांति की तरफ बढ़ेंगे या किसी बड़े सैन्य टकराव की ओर जाएंगे।
इस मामले की जड़ हौरमुज़ स्ट्रेट है जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। अमेरिका की तरफ से संकेत दिए गए हैं,कि अगर इस मार्ग को जल्द ही नहीं खोला गया तो कड़ी से कड़ी सैन्य कार्यवाही की जाएगी। व दूसरी तरफ ईरान ने भी सख्त नियमों को अपनाते हुए अपनी सैन्य तैयारी बढ़ा दी है ।
ईरान के राष्ट्रपति ने सेना को पूरी तरह सतर्क रहने और फुल कॉम्बैट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के अनुसार ईरान ने अपने रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के द्वारा हौरमुज़ स्ट्रेट के पास अपनी एंटी शिप मिसाइल तैनात कर दी है। साथ ही वहां पर कड़ी निगरानी भी रखी जा रही है और संदिग्ध गतिविधि व जहाज की आवाजाही पर भी नज़रे रखी जा रही हैं। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए इस दबाव की राजनीति को हताश बताया है।
दूसरी तरफ ,अमेरिका ने भी अपनी सैन्य गतिविधियों को तेज कर दिया। उच्च स्तर की बैठकों का आयोजन किया जा रहा है और रणनीति पर काम किया जा रहा है। संदेश के अनुसार बी-52 जैसे भारी बम-वर्षा वाले विमान भी तैयार रखे जा रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत उनका इस्तेमाल किया जा सके। इसके साथ ही ईरान के अहम ठिकानों पर नजर रखने के लिए जासूसी विमानो की गतिविधियां भी बढ़ा दी गई।
बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बिगड़ते रहे तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकती है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव डालेगी। इसी तरह इजराइल ने भी अपनी स्थिति को देखते हुए हाई अलर्ट जारी किया है और अपनी सुरक्षा प्रणालियों व सेना को सक्रिय कर दिया है, ताकि किसी भी आने वाले खतरे से निपटा जा सके।
इसी के बीच भारत के साथ अन्य कई देशों के द्वारा इस संकट को टालने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास किया जा रहा हैं। साथ ही बातचीत जारी है ताकि दोनों देशों के बीच तनाव को कम हो सके व शांति ला सकें और हालात को नियंत्रण में कर सकें।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर आने वाले कुछ घंटो पर टिकी हुई है। अगर समय रहते कोई समझौता न किया गया तो, यह टकराव एक बड़े युद्ध का रूप ले लेगा जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। यह समय बहुत नाज़ुक व संवेदनशील माना जा रहा है जहाँ हर एक छोटा फैसला भविष्य की दिशा तय करेगा।


