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अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में पंजाब विधानसभा का सर्वसम्मत प्रस्ताव

पंजाब विधानसभा ने मंगलवार को प्रस्तावित भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया। सदन में पारित इस प्रस्ताव में कहा गया कि यह समझौता राज्य के कृषि क्षेत्र और किसानों के हितों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। विधानसभा में इस मुद्दे पर हुई चर्चा के दौरान विभिन्न दलों के सदस्यों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते बिना व्यापक परामर्श के किए जाने से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

सदन में बोलते हुए कई विधायकों ने कहा कि पंजाब की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है और राज्य के लाखों किसान अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि विदेशी कृषि उत्पादों को बड़े पैमाने पर भारतीय बाजार में प्रवेश मिलता है तो स्थानीय किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। इससे फसलों के दामों पर भी दबाव बढ़ सकता है और किसानों की आय प्रभावित हो सकती है।

विधानसभा में यह भी कहा गया कि किसानों को पहले से ही उत्पादन लागत में वृद्धि, मौसम की अनिश्चितता और बाजार में उतार-चढ़ाव जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में किसी भी व्यापार समझौते से पहले किसानों की स्थिति और उनके हितों को ध्यान में रखना अत्यंत आवश्यक है। सदस्यों ने कहा कि कृषि क्षेत्र देश की खाद्य सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए इस क्षेत्र से जुड़े निर्णय अत्यंत सावधानी और व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही लिए जाने चाहिए।

सदन में पारित प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र सरकार से आग्रह किया गया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले राज्यों, कृषि विशेषज्ञों और किसान संगठनों से विस्तृत चर्चा की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि ऐसे किसी भी समझौते से देश के किसानों और कृषि क्षेत्र को नुकसान न पहुंचे।

विधानसभा के सदस्यों ने कहा कि पंजाब के किसान देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देते रहे हैं और हरित क्रांति के समय से ही राज्य ने कृषि उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभाई है। इसलिए राज्य के किसानों के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

सदन में यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो किसानों की आय बढ़ाने, कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में सहायक हों। प्रस्ताव के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि पंजाब सरकार और विधानसभा राज्य के किसानों के हितों की रक्षा के लिए एकजुट हैं।

विधानसभा में पारित यह प्रस्ताव केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने और राज्यों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित और किसान हितैषी नीति बनाने की अपील करता है।

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