पंजाब के पटियाला शहर में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरगामी कदम उठाया गया है। शहर के एक श्मशान घाट में अत्याधुनिक एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस (APCD) स्थापित की गई है, जो अंतिम संस्कार के दौरान निकलने वाले धुएं और जहरीले कणों को नियंत्रित करने का काम करेगी। यह पहल न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल के रूप में देखी जा रही है।दरअसल, पारंपरिक तरीके से किए जाने वाले अंतिम संस्कार में बड़ी मात्रा में धुआं, कार्बन कण और हानिकारक गैसें निकलती हैं, जो आसपास के वातावरण को प्रदूषित करती हैं और लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालती हैं। खासकर श्मशान घाट के आसपास रहने वाले लोगों को सांस संबंधी बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में इस नई तकनीक का इस्तेमाल एक बड़ी राहत साबित हो सकता है।यह APCD सिस्टम चिता से निकलने वाले धुएं को सीधे वातावरण में जाने से पहले एक विशेष चैंबर में खींचता है, जहां फिल्टर और आधुनिक तकनीक के जरिए उसमें मौजूद प्रदूषक तत्वों को काफी हद तक कम किया जाता है। इसके बाद ही अपेक्षाकृत साफ हवा बाहर छोड़ी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हवा में पार्टिकुलेट मैटर (PM) और जहरीली गैसों की मात्रा में उल्लेखनीय कमी आएगी।प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना को एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। यदि इसके परिणाम सकारात्मक रहते हैं, तो इसे राज्य के अन्य शहरों और कस्बों के श्मशान घाटों में भी लागू किया जाएगा। यह कदम बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सरकार की गंभीरता को भी दर्शाता है।स्थानीय निवासियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे समय से वे श्मशान घाट से उठने वाले धुएं से परेशान थे, जिससे आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं होती थीं। अब इस नई व्यवस्था से उन्हें काफी राहत मिलने की उम्मीद है।पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीकें आने वाले समय में अनिवार्य हो सकती हैं, क्योंकि शहरों में बढ़ती आबादी और प्रदूषण के स्तर को देखते हुए पारंपरिक तरीकों में बदलाव जरूरी है।कुल मिलाकर, पटियाला की यह पहल न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आधुनिक तकनीक के जरिए सामाजिक और धार्मिक प्रक्रियाओं को भी अधिक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है।