पंचकूला। जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियों के चलते पंचकूला की अदालत ने एक ड्रग तस्करी मामले में आरोपी को बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने माना कि फॉरेंसिक जांच के लिए सैंपल भेजने में छह दिन की देरी और अन्य प्रक्रियात्मक त्रुटियों के कारण अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर हो गया।
अदालत ने कहा कि सैंपल को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल), मधुबन भेजने में हुई देरी के कारण साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही मौके पर सीएफएसएल फॉर्म तैयार नहीं किया गया, जो जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
मामला 24 जुलाई 2020 का है, जब सेक्टर-14 थाना पुलिस ने पिंजौर के मानकपुर ठाकुरदास निवासी सफल के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस के अनुसार सेक्टर-12ए के रेल्ली चौक क्षेत्र में गश्त के दौरान सूचना मिलने पर आरोपी की तलाशी ली गई, जिसमें उसके लोअर की जेब से करीब 50 ग्राम हेरोइन बरामद होने का दावा किया गया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि आरोपी को जिस स्थान से पकड़ा गया बताया गया, वह एक व्यस्त सार्वजनिक जगह थी, लेकिन जांच अधिकारियों ने किसी भी स्वतंत्र गवाह को जांच में शामिल नहीं किया। कुल 13 गवाहों में से 11 पुलिस अधिकारी थे।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने 6 मार्च को आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।