पंचकूला पुलिस का बड़ा खुलासा, ‘खैर माफिया’ के गिरोह के 11 आरोपी गिरफ्तार
पंचकूला पुलिस ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई करते हुए खैर के पेड़ों की अवैध कटाई और तस्करी में शामिल एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें एक वन अधिकारी भी शामिल है।
यह मामला थाना चंडीमंदिर क्षेत्र के आसरेवाली वन क्षेत्र से जुड़ा है, जहां लंबे समय से खैर के पेड़ों की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई हो रही थी। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मामले पर स्वयं संज्ञान लिया और पंचकूला पुलिस कमिश्नर शिवास कविराज को निर्देश दिए कि आरोपियों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई की जाए।
पुलिस ने एसीपी क्राइम अरविंद कंबोज के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया। जांच में सामने आया कि 25 फरवरी को वन विभाग ने लगभग 400–500 खैर के पेड़ों की अवैध कटाई का पता लगाया था। शिकायत 2 मार्च को वन खंड अधिकारी रघुविंद्र सिंह द्वारा दर्ज कराई गई। तत्परता से कार्रवाई करते हुए 12 मार्च को मुख्य आरोपी इमरान उर्फ मान्ना, हबीब खान, शकिल, सराफत, यासिन और समीम को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद अन्य आरोपी नानक और तकी खान को भी हिरासत में लिया गया।
जांच में यह खुलासा हुआ कि आरोपी दिलबहादुर (जिला सोलन, हिमाचल प्रदेश) चोरी की लकड़ी खरीदकर बेचता था, जबकि अली मोहम्मद उर्फ रोशन ट्रांसपोर्टर की भूमिका निभा रहा था। आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि वन अधिकारी रघुविंद्र सिंह को हर महीने रिश्वत दी जाती थी। इसके बाद 15 मार्च को वन अधिकारी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया।
डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक मनप्रीत सिंह सूदन ने बताया कि इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 303(2), वन अधिनियम की धारा 32, 33, वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 27, 29 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर लगभग 10 क्विंटल 50 किलोग्राम खैर की लकड़ी, नकदी, पेड़ काटने के औजार और दो पिकअप वाहन जब्त किए हैं। अब तक गिरफ्तार 11 आरोपियों में 8 सीधे कटाई करने वाले, एक खरीददार, एक ट्रांसपोर्टर और एक वन अधिकारी शामिल हैं।
पंचकूला पुलिस कमिश्नर शिवास कविराज ने कहा, “वन संपदा हमारी राष्ट्रीय धरोहर है और इसे नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस नीति है। इस गिरोह के सरगना, ट्रांसपोर्टर और भ्रष्ट अधिकारी को बेनकाब किया गया है। हमारी टीमें अब भी सक्रिय हैं और हम सुनिश्चित करेंगे कि इस अपराध सिंडिकेट की जड़ें पूरी तरह उखाड़ फेंकी जाएं।”
यह कार्रवाई न केवल अवैध कटाई और तस्करी को रोकने में अहम कदम है, बल्कि वन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और संगठित अपराध के खिलाफ भी एक स्पष्ट संदेश देती है।


