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पारस हेल्थ पंचकुला में प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी से 9 साल तक एडवांस किडनी कैंसर पर पाया काबू

टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी की मदद से मेटास्टेटिक रीनल सेल कार्सिनोमा के मरीज का लंबा और सफल इलाज

पंचकूला, 16 मार्च (): कैंसर के इलाज में आधुनिक तकनीकों और प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी की बढ़ती भूमिका का एक महत्वपूर्ण उदाहरण सामने आया है। पारस हेल्थ पंचकुला के डॉक्टरों ने 52 वर्षीय एक मरीज में एडवांस किडनी कैंसर (मेटास्टेटिक रीनल सेल कार्सिनोमा) को करीब नौ साल तक सफलतापूर्वक नियंत्रित रखते हुए इलाज किया। इस दौरान मरीज का उपचार सर्जरी, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक और व्यक्तिगत उपचार पद्धतियों के संयोजन से किया गया, जिससे उसकी स्थिति स्थिर बनी रही और वह सामान्य जीवन जी पा रहा है।
मरीज, जो दो बच्चों का पिता है, को शुरुआत में पैपिलरी रीनल सेल कार्सिनोमा (टाइप-II) का पता चला था। यह कैंसर उनकी बाईं किडनी में था। जांच में यह भी सामने आया कि कैंसर पेट में मौजूद आसपास के लिम्फ नोड्स, जिन्हें पैरा-एओर्टिक लिम्फ नोड्स कहा जाता है, तक फैल चुका था। इसका मतलब था कि बीमारी का पता चलते समय ही कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका था।

इलाज के तहत डॉक्टरों ने सबसे पहले नेफ्रेक्टॉमी की, जो एक सर्जरी होती है जिसमें प्रभावित किडनी को निकाल दिया जाता है। सर्जरी के बाद मरीज को टारगेटेड थेरेपी दी गई, जो कैंसर की विशेष कोशिकाओं पर असर करने वाला उपचार है। समय-समय पर नियमित जांच के दौरान बीमारी की स्थिति के अनुसार इलाज में बदलाव भी किए गए।

पारस हेल्थ पंचकुला के ऑन्कोलॉजी डायरेक्टर डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा, “पिछले एक दशक में कैंसर के इलाज में काफी प्रगति हुई है। प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी डॉक्टरों को पारंपरिक ‘सभी के लिए एक ही इलाज’ वाले तरीके से आगे बढ़कर मरीज के ट्यूमर की विशेषताओं के आधार पर उपचार तय करने में मदद करती है। इम्यूनोथेरेपी शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है ताकि वह कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन पर हमला कर सके। मेटास्टेटिक रीनल सेल कार्सिनोमा के इस केस में मरीज लगभग नौ वर्षों से मेडिकल निगरानी में है और उसकी स्थिति स्थिर बनी हुई है।”

पिछले कुछ वर्षों में मरीज की उपचार योजना को उसकी प्रतिक्रिया और नियमित जांच के आधार पर कई बार बदला गया। इस दौरान पीईटी-सीटी स्कैन जैसे इमेजिंग टेस्ट भी किए गए। पहले टारगेटेड थेरेपी दी गई, बाद में इम्यूनोथेरेपी शुरू की गई और फिर टारगेटेड दवाओं के अन्य विकल्प अपनाए गए, जिससे कई वर्षों तक बीमारी नियंत्रित रही।

जब बाद में कैंसर में कुछ वृद्धि देखी गई, तो डॉक्टरों ने ड्यूल चेकपॉइंट इनहिबिटर थेरेपी शुरू की। यह इम्यूनोथेरेपी का एक उन्नत रूप है, जो इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं को बेहतर ढंग से पहचानने और उन पर हमला करने में मदद करता है। मरीज ने इस वर्ष की शुरुआत में निर्धारित उपचार चक्र पूरे कर लिए हैं और वर्तमान में उनकी स्थिति स्थिर है।

डॉक्टरों के अनुसार, मरीज का इलाज मुख्य रूप से पारंपरिक कीमोथेरेपी के बजाय टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसे सटीक तरीकों से किया गया। जेनेटिक टेस्टिंग, टारगेटेड दवाओं और इम्यूनोथेरेपी में हो रही नई प्रगति रीनल सेल कार्सिनोमा जैसे कैंसर के इलाज के तरीकों को बदल रही है और इससे कई मरीजों को लंबे समय तक बेहतर जीवन जीने में मदद मिल रही है।

पारस हेल्थ पंचकुला में डॉक्टर अब अधिक से अधिक प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें मरीजों के लिए कैंसर का व्यक्तिगत इलाज तैयार करने के लिए जेनेटिक जानकारी और आधुनिक उपचार पद्धतियों का संयोजन किया जाता है।


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