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प्रेरणा से आ सकता है जीवन मे बदलाव:मनीषीसंतमुनिश्रीविनयकुमार जी आलोक

चंडीगढ, 8 फरवरी: प्रेरणा से सोच में सकारात्मकता आती है, जिससे हर चुनौती एक अवसर के रूप में दिखने लगती है। कठिन समय में भी आगे बढऩे और हार न मानने की क्षमता प्रेरणा से ही मिलती है।  जीवन मे आप किसी ने किसी से जरूर प्रेरित हुए होगें। प्रेरणा जीवन के रास्तो को बदल देती है और प्रेरणा वो कर जाती है जिससे व्यक्ति का जीवन ही बदल जाता है।  प्रेरणा ही हमको अपनी जिम्मेदारी को खुशी -खुशी पूरा करने की शक्ती देती है। आप जिसे बहुत प्यार करतें हैं चाहे वो कोई भी रिश्ते में उसके लिए आप अपनी जान की परवाह भी नही करते यह बताने के लिए की हम तुम्हे बहुत प्यार करतें हैं -आप कुछ भी करने को ,त्यागने को तत्पर रहतें हैं । पूरी दुनिया में इस तरह की तमाम घटनाएं हुई है ,होती रहेंगी। अगर हमारे किसी काम से हमारे प्रिय को पीड़ा या तकलीफ होती है तो हम अपने काम ,अपने नजरिये को भी बदल देतें हैं । कभी अगर किसी दु:ख के जिम्मेदार हम ख़ुद को मान लेतें हैं तो जीवन भर इस दु:ख से हम दुखी रहते हैं । हमारी प्रेरणा बेहतरी के हर प्रयास को करने की शक्ति जगाती है । ये शब्द मनीषीसंतमुनिश्रीविनयकुमारजीआलोक ने अणुव्रत भवन सैक्टर-24  के तुलसीसभागार मे रविवारीय सभा को संबोधित करते हुए कहे।

मनीषीसंत ने आगे कहा  जब ख़ुद पर विश्वास हो तो काम करने की प्रेरणा मिलती है । क्यों की हम जानते है कि यह काम हम कर लेंगे,जब काम की लगन लगे तो लक्ष्य का इन्तजार रहता है काम करने की प्रेरणा मिलती है। अपनी क्षमता का वास्तविक रूप प्रकट करें दिखावा न करे । जब आप सोचते हैं की मैं हार नही मानुगा तो इसके पीछे प्रेरक शक्ति ही काम करती है। भय ,कठिनाई और अपमान में भी प्रेरणा ही है । उत्साह ,खुशी और सफलता भी प्रेरणा से ही मिलती है। सफलता का एहसास ,आत्मसमान ,दृढ़ विश्वास ये सब आंतरिक प्रेरणा है । लोग हमें सम्मान दे ,हमसे जुड़े ,हमारे काम को सराहें यह सोच कर काम करना यह सब आंतरिक प्रेरणा है । सबसे बड़ी बात होती है जिम्मेदारी का एहसास ,यही एहसास आपके व्यक्तित्व और उत्साह को बढाता है । मुझे सफल होना है जब यह इक्षा होती है तो अपनी जिम्मेदारी का एहसास भी बढ़ जाता है ,सम्मान पाने की इक्षा उत्साह को बढाता है । यह दोनों एक सिक्के के दो पहलू है । दोनों मिलकर काम करने की शक्ती को बढाते हैं । कुछ लोग बहुत उदास ,निराश और हताश रहतें हैं ,अपने आपको छोटे से दायरे में रखतें हैं । इस प्रकार आदमी प्रेरणा हीन हो जाता हैं इनसे दूर रहना चाहिए ।

 मनीषीसंत ने अंत मे फरमाया अपनी उंची और अच्छी सोच के कारण काम करने के दृढ़ संकल्प के कारण ,स्वाभिमान के कारण सफलता हासिल होती है । यह सब कायम रहे इसलिए प्रेरणा चाहिए। ऊँचे दर्जे का आत्मसम्मान जिसके पास है वह अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी समझता है । वह समाज से अपने सम्मान को किसी भी कीमत पर खोने नही देता ।

इस अवसर पर अतुल मुनि जी ने फरमाया प्रेरणा से बिंधा हुआ मन हमेशा एक आशा का दीप जलाये रखता है ,हर स्थिति में समान रहता है। आत्म सम्मान से परिपूर्ण व्यक्ति दूसरों की भावनाओं और जरूरतों का भी ख्याल रखता है उसके अन्दर एक प्रकार की सेवा भावना सब के लिए होती है। आत्म सम्मान बढ़ाने के लिए कुछ नया करें कुछ अलग करें ,कुछ ऐसा करें जो सम्मान जनक को ।